Unlimited Sky......
जो कुछ वो चाहता है, उसे ओ करने दो,
पानी को रोको रुकता नहीं उसे बहाने दो,
आज मैं पर्वतों से टकरा गया आकाश को छूने चला गया, परछाई को पकड़ने लगा, अपने आप में खो गया,
मैं अपने मैं को खा गया ,
यही आज मैं समझ गया की कुछ नहीं मोह माया में, भूसा भरा इस भारी काय में, मैं मारने गया अपनी आत्मा को चौंक गया एक तख्ती को, जिस पर लिखा था विचित्र सा, मकड़ी धुल से भरा सा,,, जिस पर लिखा था अजीब सा,,,,, आत्मा मरे तो वर्षों हो गए!! पढ़ कर दिमाग के तोते उड़ गए, तो क्या सबके पास आत्मा नहीं है ,,, बीमारी कमजोरी से भरा शरीर ही है ,,अरे शरीर में क्या रखा है अब तो दिल भी धोखा दे जाता है,,बचपन के उमर होते ही हार्ट अटैक आ जाता है!!

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